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Aug 29, 2016

Essay on If I had Wings In Hindi| यदि मेरे पंख होते निबन्ध हिंदी में

जब छोटे थे हम मन में एक सवाल आता था आसमान को देख कर, यदि मेरे पंख होते तो क्या होता? अगर होते तो वो बड़े अनोखे होते। वो कभी न थमते, न कभी मुझे किसी के हाथ आते। बस उड़ा ले जाते मुझे जहाँ मेरा मन होता। जब स्कूल जाना होता, तो किसी से बिन बताये ले जाते मुझे ये उस पार्क में जहाँ सबसे ज्यादा झूलें होते और झूलने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार भी न करना पड़ता क्योंकि तब सब बच्चे स्कूल में पढ़ रहे होते।

ये पंख मिल जाते तो हवाई जहाज़ का सफर मुफ्त में होता। मैगज़ीन में जिस देश की फोटो थी, वो देश देख लिया होता। हवा मेरा ठिकाना होती, बस पैर कभी ज़मीन पे न टिकते। माँ को रोज़ कहीं न कहीं घुमा आते मैं और मेरे ये पंख। अपने बेस्ट फ्रेंड को उसके जन्म दिन पर एक दिन के लिए तोहफ़े में इन पंखों की उड़ान दे दी होती। ठंडी हवाओं में बस मैं और मेरी उड़ान होती। रोड क्रॉस करने में डर नहीं लगता क्योकि क्रॉस ही नहीं करनी पड़ती। बस हवा में हर जगह पहुँच होती मेरी। रुई जैसे बादल को अपने हाथों से छुने को मिलता। किसी बादल को आइस-क्रीम तो किसी को साइकिल बना लेते हाथों से।

Essay on If I had Wings In Hindi

मन करता की जल्दी-जल्दी हर जगह घूमना हो जाता। मेरी उड़ानों के दौरान हर सुन्दर नज़ारा मेरी आँखों के सामने से गुज़रता। पकड़म-पकड़ाई में कोई मुझे नहीं पकड़ पाता। छुपन-छुपाई खेलते हुए पेड़ों पर बड़े आराम से छिपना हो जाता। बारिश होती तो ऊपर उड़ान भरने पर समझ आ जाता कि आखिर ये बारिश होती कैसे है। किताबों से जानना नहीं पड़ता। सब सामने आसमानों में ही देखने को मिल जाता।

आज ऐसे लगता है, है तो पंख मेरे पास। मेरा ज्ञान, मेरी सोच। मैं सिर्फ शरीर तो नहीं, आत्मा हूँ। मेरे पंख मेरा ज्ञान और मेरी सोच ही तो हैं जो नजाने कहाँ-कहाँ ले जाते हैं मुझे। कितना कुछ मुझे दिखाते हैं। ज्ञान है तो, समझ होती है, हमारे कदम बस बढ़ते ही रहते हैं। पँखों की शक्ल में लगे हैं हर वक़्त, जो कोई काट नहीं सकता, अलग नहीं कर सकता। न तो ये तोड़े जा सकतें हैं, ना ही मरोड़े जा सकतें हैं क्योंकि कभी किसी के हाथ ही नहीं आ सकते। हर देश विदेश ले जा सकते हैं। सोच ही तो है, जितनी बड़ी उतना ऊँचा ले जाती है। मेरे पंख मेरे पास ही हैं । दिखते तो नहीं पर मेरे साथ ही हैं । बस ये और बड़े हो जाएँ और मुझे हर जगह ले जाए ।

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Aug 14, 2016

मेरी यादगार यात्रा पर निबंध | Essay on My Memorable Tour in Hindi

यात्रा का अपना एक सुखद अनुभव होता है। हर यात्रा अपने में कई यादें समेटे होती है पर कुछ बहोत यादगार होती हैं ।गर्मी की छुट्टियों में अधिकतर लोग घूमने जाते हैं और इस मौसम में पर्वतों की यात्रा अत्यधिक सुखद होती है। हमारी पहली पर्वतीय यात्रा पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में हुई जब पिताजी के पुराने मित्र ने नैनीताल में अपने आवास पे एक समारोह रखा और पिताजी को आमंत्रित करने के साथ साथ ज़रूर आने का आग्रह भी किया।

पिताजी ने इस आग्रह का सम्मान करते हुए समारोह में जाने के लिए और साथ साथ नैनीताल घूमने के लिए पांच दिन की योजना बनायी। हमने 20 मई को नैनीताल के लिए रेल पकड़ी और अगले दिन सुबह 10 बजे वहां पहुँच गए। स्टेशन पे पिताजी के मित्र हमें लेने आये हुए थे।

हम उनके साथ उनके घर गए। उन्होंने पिताजी की योजना की सराहना करते हुए उन्हें आने के लिए धन्यवाद कहा और हमें नैनीताल घुमाने की जिम्मेदारी अपने ड्राइवर को सौंप दी। क्योंकि समारोह तीन दिन बाद था तो हम नैनीताल घूमने निकल गए। नैनीताल के रास्ते बहुत टेड़े मेढ़े थे और रास्ते के दोनों ओर घाटियों का मनमोहक दृश्य था। कहीं ये घाटियां अत्यंत सुन्दर थीं और कहीं इनकी गहरायी डरा देने वाली थी। पर्वतों पर पेड़ों की सुंदरता देखते ही बनती थी। गर्मी के मौसम में भी शीतल हवायें मन को अत्यंत सुख दे रही थीं। नगर की सड़कें स्वछ थीं और घर साफ़ सुथरे थे नैनीताल का नाम एक ताल के कारण पड़ा जो वहां पर है जिसका नाम भी नैनीताल है। इसी ताल के एक किनारे पे नयना देवी का मंदिर है। मंदिर के बहन अत्यंत खूबसूरत पर्वत हैं जो सबका मन मोह लेते हैं। उसके अलावा भी नैनीताल मैं कई स्थल हैं जो बेहद मनमोहक हैं। तीन दिन हम काफी घूमे। उसके बाद पिताजी के मित्र के यहाँ समारोह मैं सम्मिलित होकर हमने अगले दिन घर के लिए रेल पकड़ी।

नैनीताल की यह यात्रा मेरे लिए बहुत सुखद और यादगार रही। वहां की प्राकृतिक सुंदरता ने मन मोह लिया और वहां के दृस्यों को मैं कैमरे में कैद कर लिया। अवसर मिलने पर मैं एक बार फिर ऐसी सुखद यात्रा पे वहां अवश्य जाना चाहूंगा।

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Aug 2, 2016

Newton's Third Laws of Motion For Class 9 Physics

Newton's third law :

'To every action there is an equal and opposite reaction.'

This law can be realised while dropping a ball, hammering a nail , holding a hose pipe of high pressurised water pump , during bicycling etc.


Suppose a man pushes an object with a force F, then the object react to this force with an equal and opposite of that force. That means if the man pushes the object with a force F12 then the object pushes him back with the same force F12 but as it is opposite to the direction of the man's force therefore it can be represented as -F12 . See the image.









Now we will explain the three case as shown int the video. You can also watch the video.

Case 1 [Hose Pipe]: When a man holds a hose pipe of high speed water rushing out from the pipe. The stream of water jet put an action on the hand of the man. Due to this action the man's hand pushes backward. Due a contact between pipe and the man's hand a reaction is produced that helps in holding the pipe.









Case 3 [A man jumping from a Boat]:     When a man jumps out from a boat , the boat get pushed back. It is because the the man put an action while jumping out of the boat. The boat in return produce a reaction on the man. As the boat is not fixed this force causes boat to go back. In this proces the man get support while jumping due to the reaction force.

Case 2 [Bicycling]:     While bicycling , the wheel of the bicycle exerts a pressure on the ground . This is an action against the ground. At the same time the ground also react with reverse force. This is called reaction. Due to this the man get support while bicycling.

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